
अध्याय 10 • 42 श्लोक
विभूति योग
विभूतियोगः
The Yoga of Divine Glories
अध्यायको सारांश
अर्जुनको इच्छा अनुसार श्रीकृष्णले आफ्नो विभूति (दिव्य शक्ति र रूप) हरूको वर्णन गर्नुहुन्छ। 'पाण्डवहरूमा अर्जुन म हुँ' जस्ता उदाहरणहरू दिइएको छ।
श्लोकहरू
- श्लोक 10.1
- श्लोक 10.2
- श्लोक 10.3
- श्लोक 10.4
- श्लोक 10.5
- श्लोक 10.6
- श्लोक 10.7
- श्लोक 10.8
- श्लोक 10.9
- श्लोक 10.10
- श्लोक 10.11
- श्लोक 10.12
- श्लोक 10.13
- श्लोक 10.14
- श्लोक 10.15
- श्लोक 10.16
- श्लोक 10.17
- श्लोक 10.18
- श्लोक 10.19
- श्लोक 10.20
- श्लोक 10.21
- श्लोक 10.22
- श्लोक 10.23
- श्लोक 10.24
- श्लोक 10.25
- श्लोक 10.26
- श्लोक 10.27
- श्लोक 10.28
- श्लोक 10.29
- श्लोक 10.30
- श्लोक 10.31
- श्लोक 10.32
- श्लोक 10.33
- श्लोक 10.34
- श्लोक 10.35
- श्लोक 10.36
- श्लोक 10.37
- श्लोक 10.38
- श्लोक 10.39
- श्लोक 10.40
- श्लोक 10.41
- श्लोक 10.42