भागवत गीता अध्याय १४ गुणत्रय विभाग योग — सत्व, रज र तम गुणको प्रभावको चित्रण (Bhagavad Gita Chapter 14 Gunatraya Vibhaga Yoga in Nepali)
अध्याय १४ — गुणत्रय विभाग योग: प्रकृतिका तीन गुण — सत्व, रज र तम — र तिनले जीवलाई बाँध्ने तरिका। — अध्याय १४ गुणत्रय विभाग योगको चित्रण — सत्व, रज र तमको स्वभाव, तिनका लक्षण र गुणातीत हुने मार्ग।

अध्याय 14 • 27 श्लोक

गुणत्रयविभाग योग

गुणत्रयविभागयोगः

The Yoga of the Division of Three Gunas

अध्यायको सारांश

सत्व, रज र तम — तीन गुणहरूको स्वरूप, कार्य र बन्धनको प्रकार बताइएको छ। गुणातीत (गुणहरूभन्दा माथि उठेको) व्यक्तिको लक्षण वर्णन गरिएको छ।

श्लोकहरू

  1. श्लोक 14.1
  2. श्लोक 14.2
  3. श्लोक 14.3
  4. श्लोक 14.4
  5. श्लोक 14.5
  6. श्लोक 14.6
  7. श्लोक 14.7
  8. श्लोक 14.8
  9. श्लोक 14.9
  10. श्लोक 14.10
  11. श्लोक 14.11
  12. श्लोक 14.12
  13. श्लोक 14.13
  14. श्लोक 14.14
  15. श्लोक 14.15
  16. श्लोक 14.16
  17. श्लोक 14.17
  18. श्लोक 14.18
  19. श्लोक 14.19
  20. श्लोक 14.20
  21. श्लोक 14.21
  22. श्लोक 14.22
  23. श्लोक 14.23
  24. श्लोक 14.24
  25. श्लोक 14.25
  26. श्लोक 14.26
  27. श्लोक 14.27