भागवत गीता अध्याय १८ मोक्ष सन्यास योग — शरणागति र मोक्षको चरम संदेशको चित्रण (Bhagavad Gita Chapter 18 Moksha Sannyasa Yoga in Nepali)
अध्याय १८ — मोक्ष सन्यास योग: गीताको निष्कर्ष — स्वधर्म पालन, सर्वधर्म समर्पण र मोक्षको मार्ग। — अध्याय १८ मोक्ष सन्यास योगको चित्रण — कर्म, ज्ञान, ध्यानको सार, गुण र कर्तव्यको विभाजन तथा श्रीकृष्णको अन्तिम उपदेश।

अध्याय 18 • 78 श्लोक

मोक्ष सन्यास योग

मोक्षसंन्यासयोगः

The Yoga of Liberation and Renunciation

अध्यायको सारांश

सम्पूर्ण गीताको उपसंहार। त्याग र सन्यासको निर्णय, वर्ण आश्रम धर्म, र शरणागतिको (सर्वधर्मान् परित्यज्य...) अन्तिम सन्देश।

श्लोकहरू

  1. श्लोक 18.1
  2. श्लोक 18.2
  3. श्लोक 18.3
  4. श्लोक 18.4
  5. श्लोक 18.5
  6. श्लोक 18.6
  7. श्लोक 18.7
  8. श्लोक 18.8
  9. श्लोक 18.9
  10. श्लोक 18.10
  11. श्लोक 18.11
  12. श्लोक 18.12
  13. श्लोक 18.13
  14. श्लोक 18.14
  15. श्लोक 18.15
  16. श्लोक 18.16
  17. श्लोक 18.17
  18. श्लोक 18.18
  19. श्लोक 18.19
  20. श्लोक 18.20
  21. श्लोक 18.21
  22. श्लोक 18.22
  23. श्लोक 18.23
  24. श्लोक 18.24
  25. श्लोक 18.25
  26. श्लोक 18.26
  27. श्लोक 18.27
  28. श्लोक 18.28
  29. श्लोक 18.29
  30. श्लोक 18.30
  31. श्लोक 18.31
  32. श्लोक 18.32
  33. श्लोक 18.33
  34. श्लोक 18.34
  35. श्लोक 18.35
  36. श्लोक 18.36
  37. श्लोक 18.37
  38. श्लोक 18.38
  39. श्लोक 18.39
  40. श्लोक 18.40
  41. श्लोक 18.41
  42. श्लोक 18.42
  43. श्लोक 18.43
  44. श्लोक 18.44
  45. श्लोक 18.45
  46. श्लोक 18.46
  47. श्लोक 18.47
  48. श्लोक 18.48
  49. श्लोक 18.49
  50. श्लोक 18.50
  51. श्लोक 18.51
  52. श्लोक 18.52
  53. श्लोक 18.53
  54. श्लोक 18.54
  55. श्लोक 18.55
  56. श्लोक 18.56
  57. श्लोक 18.57
  58. श्लोक 18.58
  59. श्लोक 18.59
  60. श्लोक 18.60
  61. श्लोक 18.61
  62. श्लोक 18.62
  63. श्लोक 18.63
  64. श्लोक 18.64
  65. श्लोक 18.65
  66. श्लोक 18.66
  67. श्लोक 18.67
  68. श्लोक 18.68
  69. श्लोक 18.69
  70. श्लोक 18.70
  71. श्लोक 18.71
  72. श्लोक 18.72
  73. श्लोक 18.73
  74. श्लोक 18.74
  75. श्लोक 18.75
  76. श्लोक 18.76
  77. श्लोक 18.77
  78. श्लोक 18.78