
अध्याय 4 • 42 श्लोक
ज्ञान कर्म सन्यास योग
ज्ञानकर्मसंन्यासयोगः
Renunciation of Action through Knowledge
अध्यायको सारांश
श्रीकृष्णले म अवतार लिन्छु (यदा यदा हि धर्मस्य...) भनी आफ्नो दिव्य जन्म र कर्मको रहस्य बताउनुहुन्छ। ज्ञानद्वार कर्मलाई भस्म गर्ने विधि सिकाइएको छ।
श्लोकहरू
- श्लोक 4.1
- श्लोक 4.2
- श्लोक 4.3
- श्लोक 4.4
- श्लोक 4.5
- श्लोक 4.6
- श्लोक 4.7
- श्लोक 4.8
- श्लोक 4.9
- श्लोक 4.10
- श्लोक 4.11
- श्लोक 4.13
- श्लोक 4.14
- श्लोक 4.15
- श्लोक 4.16
- श्लोक 4.17
- श्लोक 4.18
- श्लोक 4.19
- श्लोक 4.20
- श्लोक 4.21
- श्लोक 4.22
- श्लोक 4.23
- श्लोक 4.24
- श्लोक 4.25
- श्लोक 4.26
- श्लोक 4.27
- श्लोक 4.28
- श्लोक 4.29
- श्लोक 4.30
- श्लोक 4.31
- श्लोक 4.32
- श्लोक 4.33
- श्लोक 4.34
- श्लोक 4.35
- श्लोक 4.36
- श्लोक 4.37
- श्लोक 4.38
- श्लोक 4.39
- श्लोक 4.40
- श्लोक 4.41
- श्लोक 4.42