भागवत गीता अध्याय २ सांख्य योग — आत्माको अमरता र ज्ञानको प्रकाश देखाउँदै श्रीकृष्णले अर्जुनलाई दिएको उपदेशको चित्रण (Bhagavad Gita Chapter 2 Sankhya Yoga in Nepali)
अध्याय २ — सांख्य योग: आत्मा अमर छ, शरीर नश्वर। ज्ञान, कर्तव्य र स्थितप्रज्ञताको मूल सिद्धान्त यहाँ प्रकट हुन्छ। — अध्याय २ सांख्य योगको चित्रण — आत्माको अमरता, निष्काम कर्म र सुखदुःखमा समत्वको सारभूत ज्ञान। गीताको सबैभन्दा महत्वपूर्ण अध्याय।

अध्याय 2 • 72 श्लोक

सांख्य योग

साङ्ख्ययोगः

The Yoga of Knowledge

अध्यायको सारांश

यो अध्यायलाई गीताको सार मानिन्छ। श्रीकृष्णले अर्जुनलाई आत्माको अमरता, शरीरको नश्वरता र कर्मयोगको सिद्धान्त बुझाउँदै शोक त्याग्न प्रेरित गर्नुहुन्छ।

श्लोकहरू

  1. श्लोक 2.1
  2. श्लोक 2.2
  3. श्लोक 2.3
  4. श्लोक 2.4
  5. श्लोक 2.5
  6. श्लोक 2.6
  7. श्लोक 2.7
  8. श्लोक 2.8
  9. श्लोक 2.9
  10. श्लोक 2.10
  11. श्लोक 2.11
  12. श्लोक 2.12
  13. श्लोक 2.13
  14. श्लोक 2.14
  15. श्लोक 2.15
  16. श्लोक 2.16
  17. श्लोक 2.17
  18. श्लोक 2.18
  19. श्लोक 2.19
  20. श्लोक 2.20
  21. श्लोक 2.21
  22. श्लोक 2.22
  23. श्लोक 2.23
  24. श्लोक 2.24
  25. श्लोक 2.25
  26. श्लोक 2.26
  27. श्लोक 2.27
  28. श्लोक 2.28
  29. श्लोक 2.29
  30. श्लोक 2.30
  31. श्लोक 2.31
  32. श्लोक 2.32
  33. श्लोक 2.33
  34. श्लोक 2.34
  35. श्लोक 2.35
  36. श्लोक 2.36
  37. श्लोक 2.37
  38. श्लोक 2.38
  39. श्लोक 2.39
  40. श्लोक 2.40
  41. श्लोक 2.41
  42. श्लोक 2.42
  43. श्लोक 2.43
  44. श्लोक 2.44
  45. श्लोक 2.45
  46. श्लोक 2.46
  47. श्लोक 2.47
  48. श्लोक 2.48
  49. श्लोक 2.49
  50. श्लोक 2.50
  51. श्लोक 2.51
  52. श्लोक 2.52
  53. श्लोक 2.53
  54. श्लोक 2.54
  55. श्लोक 2.55
  56. श्लोक 2.56
  57. श्लोक 2.57
  58. श्लोक 2.58
  59. श्लोक 2.59
  60. श्लोक 2.60
  61. श्लोक 2.61
  62. श्लोक 2.62
  63. श्लोक 2.63
  64. श्लोक 2.64
  65. श्लोक 2.65
  66. श्लोक 2.66
  67. श्लोक 2.67
  68. श्लोक 2.68
  69. श्लोक 2.69
  70. श्लोक 2.70
  71. श्लोक 2.71
  72. श्लोक 2.72