भागवत गीता अध्याय ३ कर्म योग — निष्काम कर्म र कर्तव्यपालनको मार्ग देखाउँदै श्रीकृष्ण र अर्जुनको चित्रण (Bhagavad Gita Chapter 3 Karma Yoga in Nepali)
अध्याय ३ — कर्म योग: फलको आसक्ति त्यागेर आफ्नो कर्तव्य कर्म गर्नु नै मोक्षको मार्ग हो। — अध्याय ३ कर्म योगको चित्रण — निष्काम कर्म, स्वधर्म पालन र फलत्यागको सिद्धान्त, जसले जीवनमा सफलता र मानसिक शान्ति दुवै दिन्छ।

अध्याय 3 • 43 श्लोक

कर्म योग

कर्मयोगः

The Yoga of Action

अध्यायको सारांश

यस अध्यायमा निष्काम कर्मको महत्ता बताइएको छ। श्रीकृष्णले कर्म सन्यासभन्दा निष्काम कर्मयोग श्रेष्ठ भएको र सबैले आफ्नो स्वभावअनुसार कर्म गर्नुपर्ने बताउनुहुन्छ।

श्लोकहरू

  1. श्लोक 3.1
  2. श्लोक 3.2
  3. श्लोक 3.3
  4. श्लोक 3.4
  5. श्लोक 3.5
  6. श्लोक 3.6
  7. श्लोक 3.7
  8. श्लोक 3.8
  9. श्लोक 3.9
  10. श्लोक 3.10
  11. श्लोक 3.11
  12. श्लोक 3.12
  13. श्लोक 3.13
  14. श्लोक 3.14
  15. श्लोक 3.15
  16. श्लोक 3.16
  17. श्लोक 3.17
  18. श्लोक 3.18
  19. श्लोक 3.19
  20. श्लोक 3.20
  21. श्लोक 3.21
  22. श्लोक 3.22
  23. श्लोक 3.23
  24. श्लोक 3.24
  25. श्लोक 3.25
  26. श्लोक 3.26
  27. श्लोक 3.27
  28. श्लोक 3.28
  29. श्लोक 3.29
  30. श्लोक 3.30
  31. श्लोक 3.31
  32. श्लोक 3.32
  33. श्लोक 3.33
  34. श्लोक 3.34
  35. श्लोक 3.35
  36. श्लोक 3.36
  37. श्लोक 3.37
  38. श्लोक 3.38
  39. श्लोक 3.39
  40. श्लोक 3.40
  41. श्लोक 3.41
  42. श्लोक 3.42
  43. श्लोक 3.43